वाराणसी में शंकराचार्य का सीएम योगी पर तीखा प्रहार, संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम

वाराणसी में शंकराचार्य का सीएम योगी पर तीखा प्रहार, संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम

वाराणसी में आयोजित प्रेस वार्ता में Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री—Brajesh Pathak और Keshav Prasad Maurya—भाजपा को हो रही क्षति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन “मठाधीश महाराज हठ पर उतारू हैं।”

 “कालनेमि कौन है?” – स्पष्टीकरण की मांग

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें समाज में “कालनेमि” जैसे लोगों के प्रवेश की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा कि आखिर कालनेमि कौन है? यदि यह स्पष्ट नहीं किया जाता, तो समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज को तय करना होगा कि वे “शास्त्र और सनातन” के साथ हैं या किसी व्यक्ति विशेष के साथ। इस संबंध में उन्होंने 10 दिन का समय देते हुए कहा कि यदि उत्तर नहीं मिला, तो मौन को समर्थन माना जाएगा।

 101 बटुकों के पूजन पर प्रतिक्रिया

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा लखनऊ स्थित आवास पर 101 बटुकों के पूजन कार्यक्रम पर शंकराचार्य ने कहा कि यह कदम उनकी भावना को दर्शाता है। उनके अनुसार, यदि यह कदम राजनीतिक न होकर आत्मिक होता, तो उस बटुक को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता, जिसके साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ था।

उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि “बटुकों को पीटने पर महापाप लगेगा” जैसे बयान यह दर्शाते हैं कि संबंधित पदाधिकारियों के पास ठोस कार्रवाई की शक्ति नहीं है।

 11 मार्च को लखनऊ में संत समाज की बैठक

शंकराचार्य ने घोषणा की कि 10 दिन के भीतर संत, महंत और विद्वान अपना पक्ष स्पष्ट करें। इसके बाद 11 मार्च को लखनऊ में संत समाज की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी।

उन्होंने गो-संरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि केवल फिल्म को टैक्स फ्री करना या प्रशासनिक निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है।

 मौनी अमावस्या विवाद की पृष्ठभूमि

18 जनवरी को प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य की पालकी को पुलिस द्वारा रोके जाने से विवाद उत्पन्न हुआ था। पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई, कुछ समर्थकों को हिरासत में लिया गया और पालकी को संगम से दूर ले जाया गया। इस घटना के बाद शंकराचार्य ने विरोध स्वरूप धरना भी दिया था।

 विधानसभा में सीएम का पक्ष

विवाद पर विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता” और कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक समान व्यवस्था लागू की गई थी और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं